आयु
| बाह्य जगत | अंतर जगत |
| आयु बढ़ती है | आयु घटती है |
| मोह से प्रभावित | निर्मोह से |
| आयु बढ़ने के साथ अभिमान | बची आयु के सदुपयोग के भाव |
जीवन की सबसे बड़ी गलती… आयु को न देखने की।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
| बाह्य जगत | अंतर जगत |
| आयु बढ़ती है | आयु घटती है |
| मोह से प्रभावित | निर्मोह से |
| आयु बढ़ने के साथ अभिमान | बची आयु के सदुपयोग के भाव |
जीवन की सबसे बड़ी गलती… आयु को न देखने की।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
One Response
आयु को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अंतर जगत का उल्लेख किया गया है, उस पर सोचना परम आवश्यक है।