उत्तम संयम धर्म
कषायों को मंद करने के बाद ही सत्य प्रकट होता है और सत्य हाथ से फिसल न जाए उसके लिए संयम रखना पड़ता है/ संयम की बाड़ लगानी पड़ती है।
संयम बांधता नहीं बल्कि हमारी गलत धारणाओं से हमें निर्बंध करता है।
संयम दो प्रकार का… एक इंद्रिय संयम (पाँचों इंद्रियों को नियंत्रण में रखना), दूसरा प्राणी संयम (प्राणियों की रक्षा, हमारे द्वारा उनका घात ना हो)।
जिसे अपनी जीभ पर नियंत्रण है, उसका जीवन पर नियंत्रण रहता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी




One Response
उत्तम संयम धर्म में इच्छाओं और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। मनुष्य की इच्छाओं की सीमाएं न होने के कारण दुःखी रहता है। अतः मन को स्थिर रखने के लिए कामनाओं पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मन, भावों, व्यवहार,वाणी,समय एवं मोबाइल पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है। अतः संयम का आधार रखना परम आवश्यक है।