Posted by admin on July 30, 2011 at 12:22 pm ·
देवों में समाधि :-
समाधि में शरीर और कषाय को कृश किया जाता है । देव आहार तो छोड़ नहीं सकते, पर कषायों को कृश करते हुये मरण का वर्णन आदिपुराण आदि ग्रंथों में आया है ।
जिज्ञासा समाधान – 194
Posted by admin on July 29, 2011 at 10:51 am ·
नख और बाल :-
नख और बालों में आत्मा के अंश नहीं होते, यह तो मल होते हैं । जड़ में अंश नहीं होते हैं ।
इसलिये जब भगवान शरीर छोड़ते हैं तब नख और बाल रह जाते हैं वरना ये भी कपूर की तरह उड़ जाते ।
पं. रतनलाल बैनाड़ा जी
Posted by admin on July 26, 2011 at 11:52 am ·
शासन काल :-
महावीर भगवान जन्म से लेकर दिव्यवाणी खिरने तक, पार्श्वनाथ भगवान के शासन काल में रहे ।
पं. रतनलाल बैनाड़ा जी
Posted by admin on July 25, 2011 at 01:10 pm ·
उदयगिरी/खंड़गिरी
उदयगिरी में भगवान का मंदिर बनवाया गया है,
खंड़गिरी में संतों के ध्यान लगाने के लिये गुफाएँ हैं ।
संत रहेंगे तभी धर्म रहेगा ।
मुनि श्री सौरभसागर जी
Posted by admin on July 18, 2011 at 11:59 am ·
भिंड़ी :-
भिंड़ी भक्ष्य है पर त्रस जीव बहुत जल्दी पैदा होते हैं, सो खुद सावधानी पूर्वक बनाए, सवारें ।
पं. रतनलाल बैनाड़ा जी
Posted by admin on July 12, 2011 at 10:00 am ·
बलि :-
पद्मनंदि पंचविंशतिका तथा सागार धर्मामृत में बलि शब्द का प्रयोग है ।
इसका मतलब है ‘उपहार’ या ‘भेंट’ ।
जिज्ञासा समाधान – 192
Posted by admin on July 08, 2011 at 12:09 pm ·
‘The Silent Earth’ :-दि. जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी द्वारा लिखित महाकाव्य ‘मूकमाटी’ का अँग्रेज़ी अनुवाद ‘The Silent Earth’ (By pt. Lalchandra Jain) का विमोचन राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमति प्रतिभा देवीसिंह जी पाटिल तथा जैन समुदाय के विशिष्ट लोगों के सानिध्य में संपन्न हुआ ।
समारोह का संयोजन सुश्री शोभना जैन (वरिष्ठ पत्रकार UNI) तथा संचालन सुश्री अनुपमा जैन के द्वारा किया गया ।
Posted by admin on July 06, 2011 at 03:40 pm ·
लिंग/वेद :-
भाव लिंग और भाव वेद पर्यायवाची हैं ।
पं. रतनलाल बैनाड़ा जी