अपने घर को अपना न कहकर भगवान का कहने से घर में गलत काम नहीं हो पायेंगे।
जैसे मन्दिर में नहीं कर पाते।

ज्ञान दो साधनों से –>
1. वस्तु(अजीव) जगत से… इसमें स्थायीपना होता है सो प्रमाणिक है जैसे आग जलाती है। आजकल इसका आदर बहुत बढ़ गया है।
2. जीव जगत से…इसमें स्थिरता नहीं। आदर घट गया है।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

भाग्य / पुरुषार्थ…
एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने मेरी उम्र 62 वर्ष बतायी थी। फिर थोड़ा धर्म/ अनुशासित जीवन किया तो 72 वर्ष पर आ गया। तब धर्मादि और बढ़ाये, 80 वर्ष तक आ चुका हूँ, लगता है 82 वर्ष होने की सम्भावना है।

चिंतन

शुभ… यानी अशुभ से दूर।
लाभ… यानी फायदा –> संसार में धनादि का (धर्म में आत्मकल्याण का)।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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