प्राय: पुण्य के उदय में पाप करने का मन होता है और पाप के उदय में पुण्य का।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

गाड़ी जब रिवर्स में जाती है तब गति तो कम पर सावधानी ज़्यादा रखनी पड़ती है।
ऐसे ही बाहर से अंदर की यात्रा करते समय गति तो कम पर सावधानी बहुत रखनी चाहिए।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

धर्म से ज़्यादा (जल्दी) कल्याण धर्मात्मा से।
नमोस्तु धर्म को, आशीर्वाद धर्मात्मा से।
पूजा धर्म की, फल धर्मात्मा बनने पर।
3 अनुयोगों (75% धर्मशास्त्र) में धर्मात्मा की चर्चा, 1 अनुयोग (द्रव्यानुयोग) में धर्म की।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर चीता होता है। फिर भी वह 10 बार शिकार के पीछे दौड़ता है तो एक बार शिकार को पकड़ पाता है।
कारण?
भूख से ज्यादा जान महत्वपूर्ण होती है।

चिंतन

हमारे पुण्य कर्मों/ दुआओं का प्रभाव हमारे प्रियजनों पर होता है या नहीं ?
उनके दुःख से आप दुःखी होते हैं तो आपके पुण्य से वे सुखी न होंगे ?
हाँ ! उनके पापोदय की अधिकता में आपका पुण्य/ दुआएं प्रभावशाली नहीं होंगी।
ऐसा ही बद-दुआ में लगा लेना।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

गाड़ी आगे चले या पीछे ईंधन तो खपेगा ही। सुकर्म करें या दुष्कर्म, कर्म तो बधेंगे ही। गाड़ी आगे जाने पर गंतव्य पहुँचोगे, पीछे जाने पर गंतव्य से दूर।

आर्यिका श्री स्वस्तिभूषणमति माताजी

दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं…
पहले… भूमि पर उगे बरगद की तरह जो सबको छाया आदि देते हैं।
दूसरे… उस बरगद जैसे जो दीवार आदि पर उग आते हैं। छाया कम, जहाँ आश्रय पाते हैं, उसे ही तोड़ देते हैं।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930