Month: July 2025
मिथ्यात्व / कषाय
मिथ्यात्व पदार्थों को छोड़ने नहीं देती। कषाय किसी के पास आने नहीं देती (अंदर भी जाने नहीं देती)। मुनि श्री विनम्रसागर जी
कल्प
कहा गया है कि कल्प पहले से सोलहवें स्वर्ग में होते हैं। तो भवनत्रिक में ? वहाँ देवों में Categories तो होती हैं पर उन्हें
ज्ञान
अज्ञानी बच्चे हाथी के आगे-आगे चलते हैं (हाथी जो ज्ञान का प्रतीक है और अज्ञानी बच्चे मान के)। वही बच्चे पागल के पीछे-पीछे ताकि उसे
रस ऋद्धि
जब रस ऋद्धियों में मधुर, क्षीर, घी, दूध सारे अच्छे रस आ गये तब अमृत-ऋद्धि में क्या बचा ? योगेंद्र देव पुनीत/ आयुवर्द्धक पेय जैसे
सत्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… झूठ यदि सफ़ेद हो सकता है तो सत्य को कड़वा कहने में क्या दुविधा ! पर सत्य होता
भूख
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… प्रशस्त भूख (समय पर भूख लगना) साता के उदय में ही लगती है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड
आदमियत
एक आदमी था। राजा बनते ही आदमी मर गया, राजा जीता रहा। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
सकाम और अविपाक निर्जरा
सकाम और अविपाक निर्जरा में क्या अंतर है ? योगेंद्र सकाम पुरुषार्थ की अपेक्षा कहा है, अविपाक पकने की अपेक्षा, भावार्थ और अभिप्राय दोनों का
स्वाभिमान / अभिमान
स्वाभिमान के साथ जब अकड़ आ जाती है तब वह अभिमान का रूप ले लेता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4.4.22)
अवतार
जैन दर्शन में अवतार नहीं, “अब-तार”(तर) है। तरने के लिए पहले हमको भक्त बनना होगा, भक्त जो गुरु और प्रभु को चाहे। फिर शिष्य बनेंगे,
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