Category: डायरी
कृतघ्न
कृत = किया हुआ। हन = हँता/ विनाशक। कृतघ्न = जो किये गये उपकार को नकार दे। (कमल कांत)
विचार / विकार
विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं। एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि
प्रचलित वस्तुऐं
कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था। अत्याचार –> राजा आदि के लिये। अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों
मापदंड
राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी। सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोडे, सैनिक
साधु
काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”। साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
रुलाना
रुलाना…. किसी को रुलाने का पाकीज़ा तरीका… हँसाओ इस क़दर कि पानी निकल आये, हम तो दुश्मन को भी पाकीज़ा सज़ा देते हैं। हाथ उठाते
वाकपटुता
नया व्यक्ति गाँव में पहुँचा। पूछा –> यहाँ के लोग कैसे हैं ? मैं ही ईमानदार हूँ (पूरे गाँव के बारे में कथन हो गया)।
विचार
अकेला कोई रहना नहीं चाहता। दो होते ही… तीन…चार। तालाब में पत्थर फैंकते ही एक, फिर अनेक लहरें उठ जाती हैं। ऐसे ही विचार एक
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