Category: चिंतन
पुण्य क्रियायें
घना कोहरा पूरे दिन छाया रहा। सूरज भी पूरे दिन ताप देता रहा, फिर भी कोहरा कम न हुआ। हमारी पुण्य क्रियायें भी ऐसी ही
प्रतिक्रिया
गुस्से वाले मुर्गे के सामने शीशा रख दो। मुर्गा चोंच मार-मार कर खुद को घायल कर लेगा। दूसरा मुर्गा बच जाएगा। हम भी यदि प्रतिक्रिया
अभ्यास
आम के बौर आते ही एक चिड़िया की नई सी आवाज आई। थोड़े अंतराल के साथ आवाज मधुर होती गई। अंत में वह कोयल की
कोटा
कोटा पद्धत्ति तो Tension ही देती है। चाहे सरकारी नौकरियों में हो या धार्मिक क्रियाओं का (कोटा फिक्स करके धर्म करना)। चिंतन
आत्मा
“कौन बनेगा करोडपति” टी. वी. प्रोग्राम में कठिन प्रश्नों के जबाब Elimination से निष्कर्ष पर आते हैं। ऐसे ही आत्मा के बारे में जानना बहुत
बाह्य आवरण
आँख आदि की दवा परिवार में कई लोग डालते हैं। अपनी-अपनी डिब्बी पर निशान बना लेते हैं। कुछ दिनों में डिब्बियाँ खराब हो जाती हैं,
तृष्णा
संसार की तृष्णा को लता कहा है, क्योंकि लता तेजी से बढ़ती है, ज़रा सा निमित्त मिल जाए तो बहुत तेजी से। चिंतन
धर्मात्मा
“वस्तु का स्वभाव ही धर्म है।” तुम धर्मात्मा बनना चाहते हो ? यदि हाँ, तो अपने स्वभाव में रहो। चिंतन
विषयी
विष और विषयी शब्दों में साम्य है। विषयी के शरीर/ जीवन में विष धीरे-धीरे फैलता हुआ उसके परिवार/ समाज को भी विषाक्त कर देता है।
भूख / जान
सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर चीता होता है। फिर भी वह 10 बार शिकार के पीछे दौड़ता है तो एक बार शिकार को पकड़ पाता
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