Category: चिंतन
विषयी
विष और विषयी शब्दों में साम्य है। विषयी के शरीर/ जीवन में विष धीरे-धीरे फैलता हुआ उसके परिवार/ समाज को भी विषाक्त कर देता है।
भूख / जान
सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर चीता होता है। फिर भी वह 10 बार शिकार के पीछे दौड़ता है तो एक बार शिकार को पकड़ पाता
अर्थी
अर्थी उठने पर ही, (जीवन का) अर्थ (निस्सारता) समझ आता है। जिसकी अर्थी उठी, वह तो समझ नहीं पाया/ पाएगा, उठाने वाले तो समझें !
समता
जब किसी के प्रति राग जागृत हो तब उसके दोषों का चिंतन करें, द्वेष के समय गुणों का । गुण/ अवगुण तो सब में होते
सब सर्वोत्तम
जो सब कुछ सर्वोत्तम चाहते हैं। वे अगले भव में द्रौपदी (पौराणिक परम्परानुसार) बनते हैं। द्रोपदी ने 5 क्षेत्रों के सर्वोत्तम पति का वरदान मांगा
प्रतिक्रिया
पागल को जवाब देने वाला “डबल पागल”। आधे पागल (क्रोधादि में) को जवाब देने वाला फुल पागल ही तो कहलायेगा ना ! चिंतन
दीन / शुद्ध
अपने को दीन मानना जैसे हीरे को काँच मानना। शुद्ध मानना जैसे खदान में पड़े हीरे को तराशा हुआ हीरा मानना। चिंतन
पुरुषार्थ / भाग्य
पुरुषार्थ पहले या भाग्य ? सुभाष भाग्य से ही पुरुषार्थ कर पाते हैं। तब और ज्यादा अच्छा भाग्य बन जाता है, फिर ज्यादा पुरुषार्थ कर
मान
कार के टायर के नीचे आने से पैर कुचल गया। पर टायर तो रबड़ का और रबड़ मुलायम ? हवा भर दी सो कठोर हो
संबंध
बच्चा माता पिता के बीच सो रहा है, सर्वाधिक सुरक्षित महसूस करता है। स्वप्न में शेर उसे खाने आया। बचाएगा कौन ? कोई संबंधी नहीं।
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