Category: चिंतन
पूर्ण
सब अपनी-अपनी अपेक्षा से पूर्ण हैं जैसे पानी से भरी छोटी तथा बड़ी बाल्टियाँ। छोटी बाल्टी में पानी और डालो तो पानी Waste ही होगा,
वर्तमान का भगवान
जिस घर में काम कर रहा हो/ रह रहे हो उसे हल्का, दूसरे घर को बेहतर मानें/ कहे तो नुकसान होगा न ! जिस भगवान
कर्म सिद्धांत
अकाउंट में डबल एंट्री होती हैं, लेन-देन की अलग-अलग। कर्म सिद्धांत में भी ऐसा ही है… जिसने गाली खाई उसके में -ve एंट्री हो गई
पेंशन
सेवा में थे तब पूरी पगार, सेवा-निवृत्त होने पर आधी। आज (81 साल के होने पर) पूछते हैं… कैसे हो ? सेहत/ हालात पेंशन वाले*
छाया / अंधकार
छाया और अंधकार में फ़र्क़ क्या है ? अंधकार… प्रकाश का अभाव। छाया….. प्रकाश की अवरोधित अवस्था। चिंतन
वृद्धावस्था के लाभ
वृद्धावस्था के लाभ… सर्दी लगी/ छींक आयी, डबल कपड़े पहन लिए (युवाओं की तरह लापरवाही नहीं) समस्या समाप्त। गलती हुई, प्रायश्चित/ क्षमा माँगली, स्थिति सामान्य।
सिद्धांत
3 प्रकार के सिद्धांत – काल करे सो आज कर, आज करे सो अब….. आज करे सो कल कर, कल करे सो परसों….. आज का
आत्मा
आत्मा गुब्बारे जैसी है… जन्म के समय बिंदु के आकार की। कर्मों के अनुसार आकार बढ़ता तथा Shape लेता जाता है। जैसे गुब्बारे में हवा
पुण्य क्रियाएँ
घना कोहरा पूरे दिन छाया रहा। सूरज भी पूरे दिन ताप देता रहा, फिर भी कोहरा कम न हुआ। हमारी पुण्य क्रियाएँ भी ऐसी ही
प्रतिक्रिया
गुस्से वाले मुर्गे के सामने शीशा रख दो। मुर्गा चोंच मार-मार कर ख़ुद को घायल कर लेगा। दूसरा मुर्गा बच जाएगा। हम भी यदि प्रतिक्रिया
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