दर्शन / अध्यात्म
दर्शन के बिना अध्यात्म, जीवन चल सकता है।
बिना अध्यात्म के, दर्शन का दर्शन नहीं।
अध्यात्म स्वाधीन नयन है।
दर्शन पराधीन, उपनयन है (उदाहरण चश्मा)।
दर्शन बताया जा सकता है।
अध्यात्म महापुरुषों के द्वारा ही प्राप्ति का उपाय है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी




2 Responses
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने दर्शन /अध्यात्म का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अध्यात्म का भाव रखना परम आवश्यक है। जीवन में जिसके हृदय में आध्यात्मिक नहीं है तो दर्शन की उपयोगिता नहीं हौगी।
Acharya shri ke charnon me shat shat naman !