Day: May 29, 2025

अभिवादन

अभिवादन… जयजिनेंद्र – पारस्परिक। नमोस्तु — एक तरफा। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4 मार्च)

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बड़ा पापी

बड़ा पापी वह, जिसके मन से पश्चाताप का भाव ही समाप्त हो जाए। पश्चाताप से ही प्रायश्चित ग्रहण होता है। ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया

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मंगल आशीष

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