Month: May 2025
साक्षी में नियम
नियम किस-किस की साक्षी में ले सकते हैं ? स्वयं की साक्षी में – पर यह द्रढ़ता वाले लोगों को ही लेना चाहिए। गुरु साक्षी
राग
जानवर राग तथा द्वेष में एक सी भाषा बोलते हैं (जैसे कुत्तों का भौंकना)। मनुष्य राग में तो राग/ मोह करता ही है, द्वेष का
बुद्धि
बुद्धि तीन प्रकार की होती है। कर्तृत्व बुद्धि- कर्ता का अहम्, जो पर-नैमित्तिक है। भोक्तृत्व-बुद्धि- भोग का वहम, जो दूसरों से अपेक्षा के कारण पीड़ादायक
Thinking
शेर की +ve Thinking थी कि उस पर कोई मुसीबत नहीं आ सकती। लेकिन उसके पास Power Thinking नहीं थी, मुसीबत किसी पर भी आ
सम्मूर्च्छन जीवों की अवगाहना
स्वयंभूरमण द्वीप में उत्कृष्ट अवगाहना 1000 योजन के महामत्स्य की होती है। ये सम्मूर्च्छन से ही पैदा होते हैं। 500 योजन वाले गर्भज तथा सम्मूर्च्छन
आत्मा का शरीर छोड़ना
गुरुजन बताते हैं –> किसी भी कर्म के निषेक झड़ना शुरू में अधिक, आगे-आगे कम-कम होते जाते हैं। इसीलिए कथंचित् आगे जाकर इतने कम हो
निःस्वार्थ सेवा
दो मिलते जुलते शब्द हैं सेलफिशनेस और दूसरा सेल्फओरिएंटेड। तुच्छ उपलब्धियां के पीछे भागना सेल्फिश्नेस है जबकि सेल्फओरिएंटेड को उच्च उपलब्धियां मिलती हैं। निःस्वार्थ सेवा
साक्षी भाव
दुःख में साक्षी भाव कैसे रखें ? पक्षियों की दृष्टि बना लें। ऊपर से जब वे गंदे नाले को देखते हैं, वह भी सुंदर दिखता
असत्य / मिथ्यात्व
जो देव हैं ही नहीं या नकली देवों को देव कहना असत्य है। इन देवों को पूजना मिथ्यात्व है। कथन पर आधारित – चिंतन
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