Month: May 2025
मत/मन भेद
मतभेद मुर्दों में नहीं; सर्वज्ञों में भी नहीं, क्योंकि वे तो अनंत-पक्षीय दृष्टिकोण रखते हैं। संसारियों का मतिज्ञान क्षायोपशमिक होता है। इसलिये स्तर-भेद रहता है।
जैन धर्म
प्रख्यात लेखक खुशवंत सिंह नास्तिक थे। लेकिन एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा –> यदि कोई धर्म अपनाना हो तो जैन धर्म अपनाना, इसमें जितनी उत्कृष्टता
राम नाम का प्रभाव
लंका विजय के दौरान पुल बनाते समय हनुमान राम का नाम लिखकर पत्थर समुद्र में छोड़ते थे तो तैरने लगता था। राम ख़ुद पत्थर डालते
भाव
भाव-मन का द्रव्य-मन से नैमित्तिक संबंध है। द्रव्य-मन पौद्गलिक है इसलिये भाव-मन तथा अन्य भाव भी पौद्गलिक हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
नियंत्रण
इच्छाओं को कैसे नियंत्रित करें ? किसी मैदान में रेत बिखरी हुई है; उसका स्तर कैसे उठायें ? रेत को समेट लें; स्तर उठ जाएगा।
प्रथमोपशम
प्रथमोपशम सम्यग्दर्शन होते समय मिथ्यात्व के 3 टुकड़े सम्यग्दर्शन होने से पहले होते हैं या होने के बाद ? योगेंद्र युगपत। मुनि श्री सौम्य सागर
ज्ञानी / अज्ञानी
ज्ञानी अपराध होने पर सज़ा चाहता है/ मांगता है, मिलने पर खुश। अज्ञानी सज़ा मिलने पर जेल तोड़कर भागना चाहता है। जिन पर मुसीबत ज्यादा
उदारता
तीन मित्र रोजाना साथ-साथ जाते थे। एक दिन एक मित्र पैसे देता था दूसरे/ तीसरे दिन दूसरे। पहला मित्र कम से कम पैसे देने की
कर्म-चेतना
जो पुरुषार्थ को इच्छानुसार बदल सके वह कर्म-चेतना। एकेन्द्रियों में यह नहीं पायी जाती है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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