Month: July 2025

नकल

किसी की नकल करना आत्महत्या है।अपनी आत्मा की हत्या ही तो है! हर व्यक्ति के अपने-अपने मौलिक गुण होते हैं,उनकी हत्या ही तो होगी! मुनि

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भक्ति

आचार्य श्री विद्यासागर जी की भक्ति सिर्फ़ भगवान के लिए ही नहीं, तीनों(देव, गुरु, शास्त्र) के लिए होती थी। पपौरा जी में गर्मियों के समय

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पैसा

पैसा जड़ (निर्जीव) है, पर हमारी जड़ें हिला देता है (मनुष्यता को हिला देता है)। चिंतन

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यात्रा

7 राजू की यात्रा पूरी करके मध्य तक तो पहुँच गये हैं। अब ऊपर का 7 राजू रह गया है पर ये 50% पिछले 7

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उपयोग

शांतिधारा(भगवान के ऊपर जल ढालना) करते समय जल की धारा टूटने पर प्रायश्चित बहुतों ने लिया क्योंकि उसका उपयोग टूट गया था। पर गुरु के

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पंचम गति

ऊपर की परम गति, संयम से सिद्ध( अवस्था)। नीचे की परम असंयम से निगोद।। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

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मान

मान भी बुरा नहीं, बस विवेक रखना है कि कहाँ पर/ अभिप्राय क्या है ! मान को प्रामाणिक बना लें। आत्मकेंद्रित(Self oriented) बुरा नहीं, स्वार्थी(Selfish)

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सौधर्म और शची

40 नील शची दो सागर वाले सौधर्म के जीवन काल में होती हैं। यदि उसका जीवन काल ढाई सागर का होगा तो 50 शची हो

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शील

शील यानी स्वभाव। जैसे ज्वलनशील (जलने वाला), सहनशील। कमलकांत

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लाडू़

भगवान के निर्वाण दिवस पर लाडू़ सिद्धालय/ सिद्ध-दिवस का प्रतीक है। लाडू़ का अर्थ है – “प्रिय” नई बहू को बुंदेलखंड में “लाडली” तथा राजस्थान

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मंगल आशीष

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July 7, 2025