Day: August 15, 2025

सिद्धों में भोगादि

भोग — आत्मा में प्रति समय का ज्ञान/ चैतन्य भाव। उपभोग — वही रस/ भाव बार-बार समयों में भोगना। जैसे अनार का रस पहले घूँट

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स्वतंत्रता दिवस

1947 से पहले का भारत Physically गुलाम था, पर आज का भारत दिमागी तौर पर Ethically गुलाम है। गुणों का नीलाम होना ही गुलाम बनाता

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मंगल आशीष

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