Day: August 17, 2025

परिग्रह

तत्त्वार्थ सूत्र जी –> बहुआरम्भ/परिग्रह नरक का कारण। कितने परिग्रह को “बहु” कहा जाये? भोगने की शक्ति से ज्यादा परिग्रह “बहु” कहा जाता है। मुनि

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शिष्य / भक्त

आचार्य श्री विद्यासागर जी अपने शिष्यों और भक्तों को सिंह बनाते थे, इसलिए हंटर जैसा अनुशासन रखते थे, श्वान नहीं जिसको पट्टा डालकर घुमाया जाए।

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मंगल आशीष

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