Day: August 27, 2025

प्रचला

ऐसी निद्रा जो प्रचलित करे जैसे बैठे-बैठे झूमना/ गिरना (तीव्र निद्रा से)। प्रचला-प्रचला में लार टपकने लगती है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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सत्य

अनुसंधान जब अतिसंधान बन जाता है तब सत्य, सत्याग्रह आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। तब सत्य पर ग्रहण लग जाता है, सत्य

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मंगल आशीष

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