Month: August 2025
णमोकार
बार-बार णमोकार मंत्र का उच्चारण करना/ पढ़ना द्वादशांग का पाठ है जो पुण्य बंध और कर्म निर्जरा में कारण होता है। श्रुतकेवली को भी अंत
संहनन
आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा – इतनी सर्दी में आप बिना कपड़ों के कैसे सह लेते हैं ? आचार्य श्री – गर्मियों में गर्मी
कषाय
देव पर्याय पाने के लिए कषाय की मंदता(संज्वलन) होना ज़रूरी है, चाहे वह जीव मिथ्यादृष्टि ही क्यों न हो। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड-284
Wisdom
“Knowledge decides what to say. Behaviour decides how to say. Talent decides how much to say. Wisdom decides whether to say or not.” (J.L.Jain)
मुनिचर्या
आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मुनियों को संघ से बाहर भेजते समय पूछा – नई जगह जाकर क्या करोगे ? एक घंटा आहार/ प्रवचन के
सत्य की परीक्षा
सत्य की ही परीक्षा क्यों होती है ? सत्य बोलना या सत्य बोलने का संकल्प लेने का मतलब… आपने हायर क्लास में जाने का फॉर्म
स्वर्ग / नरक
नरक 7, स्वर्ग (16 + 3) = 19 यानी पुण्यात्मा ज्यादा। स्वर्गों में पुण्य भोगते हुए मिथ्यादृष्टि असंख्यात, नरकों में पाप भोगते हुए सम्यग्दृष्टि असंख्यात।
रिश्ते
मैंने तो मज़ाक में रोकी थी अपनी साँस, रिश्ते खुले तो शर्म से मरना पड़ा मुझे। (अरविन्द)
वैराग्य
विवाह के बाद वैराग्य अंग-अंग से, विवाह से पहले अनंग (मन) से। आचार्य श्री विद्यासागर जी
शांति
आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक व्यक्ति को लाया गया जो सुसाइड करना चाहता था। आचार्य श्री स्वाध्याय कर रहे थे। वह व्यक्ति बैठा
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