Month: August 2025
क्षायिक लाभ
अनंत गुणों का अनंत काल के लिये लाभ को क्षायिक लाभ कहते हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 2/5)
प्रतिध्वनि
हमारा संसार प्रतिध्वनियों का ही है, जिसे हम प्रतिपल जी रहे हैं। पाप कर्मों की भी प्रतिध्वनियां सताती हैं, क्रिया एक प्रतिक्रिया अनेक। यह सिद्धांत
सिद्धों में भोगादि
भोग — आत्मा में प्रति समय का ज्ञान/ चैतन्य भाव। उपभोग — वही रस/ भाव बार-बार समयों में भोगना। जैसे अनार का रस पहले घूँट
स्वतंत्रता दिवस
1947 से पहले का भारत Physically गुलाम था, पर आज का भारत दिमागी तौर पर Ethically गुलाम है। गुणों का नीलाम होना ही गुलाम बनाता
अतिशय
चौथे तथा पंचमकाल के अतिशयों में क्या अन्तर होता है ? चौथेकाल के अतिशयों से सिद्धक्षेत्र बन जाते थे, पंचमकाल के अतिशयक्षेत्र बनकर रह जाते
सीख
धूप में छाँव का अनुभव करते हो या छाँव में धूप का डर रहता है ! डरेगा वह नहीं जिसके जीवन में भगवान/ गुरु की
प्रतिक्रमण
मुनियों के प्रतिक्रमण में आँसू क्यों निकलते हैं ? प्रतिक्रमण मन, वचन, काय से करने को कहा है। आँसू निकलना काय का प्रतिक्रमण हुआ न
भादों में सावधानी
इस भादों के मास में… छाछ का निषेध है, और तीखा खाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान –
योनि / जन्म
योनि आधार है, जन्म आधेय है। इनमें भेद नहीं है। (सर्वार्थसिद्धी) आर्यिका श्री अर्हम्श्री माताजी
विरोधी
विरोधी को सहन नहीं करोगे तब तक प्रगति नहीं/अंतिम मंजिल मोक्ष नहीं। सारे महान लोगों तथा भगवानों तक ने विरोध को विनोद रूप में लिया
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