जिनवाणी विनय
अमरकंटक में स्वाध्याय के समय एक मुनिराज की टेबल हिल रही थी। उन्होंने तार से बने हुए स्टैंड को (जिस पर शास्त्र जी रखे जाते थे) टेबल के नीचे लगा दिया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा… सुनो ! यह भी जिनवाणी का आसन है। इसे टेबल के नीचे नहीं लगा सकते/ ज़मीन पर नहीं रख सकते।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (श्री जीवकांड – 18 मई)




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जिनवाणी विनय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जिनवाणी की विनय रखना परम आवश्यक है।