Category: पहला कदम
नय
सब्जी भी खरीदते समय चारों ओर से देखते हैं। आसपास वालों के बारे में निर्णय एक पक्ष को देखकर/ थोड़े समय में क्यों ले लेते
प्रगति के क्रम
प्रगति के क्रम… सम्यक्(सही) दृष्टि। सम्यक् ज्ञान…ये प्रभावित होता है… परिस्थिति, पूर्वकर्म/ संस्कार, संगति, पूर्वाग्रह, पूर्वानुभव, शिक्षा, अभ्यास। सम्यक् चारित्र…सम्यक् दृष्टि, सम्यक् ज्ञान पर आधारित
इंद्रि / मन
देखा गया है कि आँख पर पट्टी बांधकर लोग पढ़ लेते हैं। कैसे सम्भव है ? मन को ऐसा शिक्षित किया जाता है कि इंद्रियों
अर्धनारीश्वर
अर्धनारीश्वर = अर्ध ना अरि(दुश्मन) (ऐसे)ईश्वर। यानी केवली भगवान जिन्होंने आधे कर्म काट लिये हैं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
दृष्टि
पहले गुणस्थान का नाम है “मिथ्यात्व” पर हैं वे मिथ्यादृष्टि। पानी में पड़ी लकड़ी को मिथ्यादृष्टि टेढ़ी ही मानेगा। जबकि सम्यग्दृष्टि कहेगा… है तो सीधी
वीतरागता
वीतरागता तब आती है जब राग बुरा लगने लगे, पुण्य-फल से ऊब होने लगे। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
मैथुन / अब्रह्म
अब्रह्म पाप भाव है। मैथुन..चारित्र मोहनी के तीव्र उदय + वेद + राग भाव से होता है (सामान्य मोह भाव जैसे भाई बहन का स्पर्श/
अनुभव / आगम
यात्रा से लौटे ब्रह्मचारियों ने कहा कि अमुक मुनि के अनुभव से बहुत ज्ञान प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने उत्तर दिया, “अनुभव इतना महत्वपूर्ण नहीं।
जीवों के क्रम
जीवों के क्रम… शरीरों की अपेक्षा… पृथ्वीकायिक (स्थूल) पहले, वनस्पतिकायिक (निगोदिया – सूक्ष्म) बाद में। औदारिक पहले कार्मण बाद में। संख्या की अपेक्षा… पृथ्वीकायिक पहले,
अहिंसा
संसारी जीवो में हिंसा जीरो तो नहीं हो सकती। इसलिए गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी कहते थे… Minimization of Violence. प्रैक्टिस में अनर्थदंड से बचें…
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