Category: पहला कदम

संसार / मोक्ष

संसार में रह कर आनंद आ रहा है तो मोक्ष कैसे ! संसार में रहकर आनंद में रह रहे हो तो संसार कैसे !! ये

Read More »

कुदेव

जहाँ भय वहाँ प्रीति नहीं। कुदेव से भय तो रहता ही है (नाराज़ होने पर परेशान करते हैं)। फिर उनसे प्रीति कैसे हो सकती है

Read More »

काय-क्लेश / परिषह / उपसर्ग

काय-क्लेश में चलाकर काय को क्लेश दी जाती है। परिषह आतीं हैं उन पर मुनिराज जय प्राप्त करते हैं। उपसर्ग अचानक आते हैं। निर्यापक मुनि

Read More »

ज्ञान / तटस्थता

ज्ञान तटस्थता के अनुपात में आता है। केवलज्ञान तक तो समझ आता है, बाद में प्रवचन के बारे में कैसे समझें ? गिलास भर जाने

Read More »

धर्म बढ़ाना

सांसारिक कार्यों को करते हुए धर्म कैसे बढ़ायें ? धर्म है क्या ? वस्तु का स्वभाव ही धर्म है। सांसारिक क्रियाएँ करते हुए वस्तुओं (जीव,

Read More »

सुखी-दु:खी

आगमानुसार जीव सुख-दु:ख का भोक्ता है। यह भी कहा… यदि सुखी-दु:खी माना तो मिथ्यात्वी! दोनों को कैसे घटित करें ? सम्यग्दृष्टि जीव भी सुख-दु:ख तो

Read More »

पुद्गल परावर्तन

पुद्गल परावर्तन दो प्रकार… कर्म पुद्गल परावर्तन नोकर्म पुद्गल परावर्तन मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय 8)

Read More »

मंगलाचरण

मंगलाचरण में 6 अधिकार (चीजें) होती हैं… जैसे द्रव्यसंग्रह के मंगलाचरण में… मंगल…जो पुण्य ले आए/ पापों को गलाये। यहाँ श्री ऋषभदेव भगवान का नाम।

Read More »

कर्मबंध

नो-कर्मबंध के हेतु -> परिवारजन/ शरीर। नो-कर्मबंध टूटने पर कर्मबंध टूटते हैं, कर्मबंध टूटने पर नो-कर्मबंध टूटते हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय

Read More »

श्रावक

श्रावक… पाक्षिक श्रावक…भगवान का पक्ष, अणुव्रत नहीं, सप्तव्यसन त्यागी, अष्ट मूलगुणधारी, 4 गुणस्थान। नैष्ठिक श्रावक…भोजन/ पानी मर्यादित, प्रतिमाधारी, 5 गुणस्थान। साधक श्रावक… सल्लेखना अभ्यासी/ प्राप्ति।

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

August 5, 2026

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31