समवसरण में केवलज्ञान उत्पन्न हो सकता है। भरत चक्रवर्ती के सेनापति जयकुमार भगवान आदिनाथ के 71वें गणधर थे। उनको मोक्ष आदिनाथ भगवान से पहले हुआ था। गणधर समवसरण छोड़ते नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि समवसरण में केवलज्ञान हो सकता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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4 Responses
समवसरण में केवलज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
समवशरण में केवलज्ञान होने में कोई प्रॉब्लम नहीं, मोक्ष नहीं जाएँगे क्योंकि वहाँ कोई शरीर नहीं छोड़ता है और केवलज्ञान होने के बाद आप गणधर नहीं रहे, केवलज्ञानी हो गए, अब बैठे हैं तो बैठें, जाएँ तो जाएँ।
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समवसरण में केवलज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Agar ‘गणधर समवसरण छोड़ते नहीं है’, to भरत चक्रवर्ती के सेनापति ko भगवान आदिनाथ ji se pehle moksha kaise ho gaya ? Ise clarify karenge, please ?
समवशरण में केवलज्ञान होने में कोई प्रॉब्लम नहीं, मोक्ष नहीं जाएँगे क्योंकि वहाँ कोई शरीर नहीं छोड़ता है और केवलज्ञान होने के बाद आप गणधर नहीं रहे, केवलज्ञानी हो गए, अब बैठे हैं तो बैठें, जाएँ तो जाएँ।
Okay.