सुख
सबसे कम शब्दों/ समय में सुख की परिभाषा बता दें।
गुरु मौन हो गये। थोड़ी देर बैठ कर जिज्ञासु चला गया।
अगले दिन आभार प्रकट करने आया।
आज परिभाषा समझ कर (कि हड़बड़ी में सुख नहीं मिलेगा/ इंद्रियाँ शांत हों तब सुख मिलेगा) अनुभूति करने आया हूँ।
इंद्रिय सुख से बड़ा आत्मिक सुख होता है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी




4 Responses
मुनि श्री प़णम्यसागर महाराज जी ने सुख को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सुख आत्मिक होना परम आवश्यक है।
Is story me kya guru ‘मौन’ hokar sukh ki paribhasha bata rahe the ? Ise clarify karenge, please ?
सही।
Okay.