Category: वचनामृत – अन्य

बांसुरी का माधुर्य

बांसुरी में माधुर्य क्यों ? उसमें गांठ नहीं होती। बांसुरी अपने अंदर कुछ जमा/ छुपाती नहीं। बिना बुलवाये बोलती नहीं। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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दिवाली खोटी

दिवाली के दिन घर का कोई बेटा चला जाय/ घर का चिराग़ बुझ जाए तो दिवाली खोटी मानने लगते हैं। उससे पहले ढेरों दीपक जलाते

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दीक्षा

दीक्षा -> The इच्छा। The = (दीक्षा ही) सब कुछ। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – 7/25 ) The इच्छा  -> सब कुछ देने की

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पागलपन

पागल अपने को पागल नहीं कहता, यही उसका पागलपन है। हम भी अपने को वह नहीं कहते जो हम हैं, वह कहते हैं जो हम

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विचार

विचारों को पकड़ना ऐसा ही है जैसे तराजू में मेढ़कों को तौलना। क्षु. श्री सहजानंद वर्णी जी

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गृहस्थ

गृहस्थ जो गृह में स्थित हो, जो स्त्री के साथ रहे*। मुनि श्री प्रमाणसागर जी *( जो धर्म के साथ रहे वह श्रावक )

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मूर्ति

भगवान की मूर्ति…. “निरखों अंग-अंग जिनवर के, इनमें झलके शांति अपार।” अलग-अलग अंगों का अपना-अपना प्रभाव होता है, उनसे अलग-अलग एनर्जी मिलती है। अलग-अलग समय

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पूछ

पूछ की इच्छा मायाचारी है, अगले जन्म में पूँछ वाला बनने की तैयारी है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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आत्मा

आत्मा का चिंतन/ परिचय कैसे करें ? आत्मा के गुणों (श्रद्धा/ ज्ञान/ दयादि) का चिंतन करने तथा इन गुणों को जीवन में उतारने से परिचय

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सावधान

करवट चाहे रात में बदलें या दिन में, Left को लें चाहे Right को, सावधान रहते हैं (ताकि गिर ना जायं)। जब समय बदले (अच्छा

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मंगल आशीष

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November 5, 2026

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