Category: वचनामृत – अन्य
अहिंसा / हिंसा
दसलक्षण धर्म के प्रथम दिवस उत्तम-क्षमा की बधाई, सबसे क्षमा भाव। दृष्टि-संयम का पालन करें। लाभ…जीवों की रक्षा, ठोकर न लगना, विकारों का ना आना,
याचना
लघुता क्या है ? याचना। प्रश्नोत्तरी रत्नमाला (राजर्षि अमोघवर्ष) याचना किसे कहें ? प्रार्थना + स्वार्थ सिद्धि। मुनि श्री प्रमाणसागर जी संसारी वस्तुएँ मांगने से
श्रद्धा / भक्ति
श्रद्धा… अज्ञात पर, भक्ति… ज्ञात पर। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी (गुरु और भगवान तो ज्ञात हैं उन पर श्रद्धा ? हां! ज्यादातर लोगों की
सुख / हित
बच्चों के सुख को प्राथमिकता दें या हित को ? सुख मन के लिए होता है, हित जीवन के लिए। सुख को प्राथमिकता दी तो
सहज / सरल
इतने सहज भी न हो जाना की जानवरों की तरह बिना शर्म के कहीं भी/ कभी भी/ कुछ भी करने लग जाओ। बच्चों की तरह
दान / त्याग
दान पर-वस्तु का जैसे धन आदि। त्याग स्व-वस्तु का जैसे क्रोध आदि (कषाय)। क्रोध तभी आता है जब मान को धक्का लगता है। जैसे एक
ज्ञानी
आँख वस्तु को बिना छुए ज्ञान प्राप्त करती है। ज्ञानी भी जानता/ देखता है, चीज़ों में involve नहीं होता। वृद्धावस्था में इन्द्रियाँ जवाब दे देती
हार / जीत
हराने से बेहतर है, जीत लिया जाए। राम रावण को हरा नहीं सकते थे, बुराई में, सो जीत गए अच्छाई में। कई बार हार कर
साधना
भावना… मन में उस भाव को बार-बार लाना ताकि मन उस भाव के लिए तैयार/ संस्कारित हो जाए। जैसे 16 प्रहरी पीपल बहुत असरदार होती
कारुण्य भाव
दुखियों के प्रति कारुण्य भाव रखना/ हृदय द्रवित होना अच्छा है, पर दु:खी नहीं होना (दूसरों के दु:ख को अपने ऊपर ओढ़ना नहीं)। कारण/ फायदा
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