Category: वचनामृत – अन्य
संसार / मोक्ष मार्ग
संसार मार्ग… जियो और जीने दो। मोक्ष मार्ग… न मरो (मोक्ष यानी अमरता), न मरने दो (मोक्षमार्गी को देखकर अन्य भी मोक्ष-पुरुषार्थ करके अमरता की
मधुरता / उदारता
समुद्र नहीं तालाब बनो जहाँ शेर भी सिर झुका कर पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं। हम ऐसे तालाब कैसे बनें ? जीवन में
विचार
सोते समय विचार ज्यादा आते हैं/ सताते हैं, ऐसा क्यों ? पूरे दिन चाबी भरोगे तो रात को अलार्म बजेगा ही। चीजों/ घटनाओं को ज्यादा
आयु
बाह्य जगत अंतर जगत आयु बढ़ती है आयु घटती है मोह से प्रभावित निर्मोह से आयु बढ़ने के साथ अभिमान बची आयु के सद्पयोग के
भगवान / गुरु
बच्चों को भगवान की “जय” कहलवाओ तो वह कह देता है “दै”। उसकी भाषा माँ ही समझ पाती है। भगवान की भाषा गुरु ही समझते
सम्बंध
मिट्टी सुंदर, पानी भी सुंदर, आपस में सम्बंध स्थापित करते ही असुंदर कीचड़। आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी (जब दो सुंदर वस्तुओं के संबंध का आउटपुट
धार्मिक / धर्मात्मा
धार्मिक –> जो धार्मिक क्रियायें करे। धर्मात्मा –> जिसकी आत्मा में धर्म आ गया हो/ धर्म को आत्मसात कर लिया हो। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर
अपराध
जीवन का दुरुपयोग करना तो अपराध है ही लेकिन सदुपयोग ना करना भी अपराध है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
मन
दो प्रकार के मन मानो → एक शरीर का दूसरा आत्मा का। शरीर का मन कहता है खाओ पीओ ऐश करो। आत्मा का मन कहता
जीव रक्षा
वैष्णव मतानुसार श्रीकृष्ण ने छोटा गोवर्धन उठाया, हनुमान ने तो हिमालय का बड़ा पर्वत खंड*, फिर प्रसिद्धि कृष्ण को ज़्यादा क्यों ? कृष्ण ने बहुत
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