होश को आचार्य श्री विघासागर महाराज ने परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जोश के साथ होश रखना परम आवश्यक है। अतः जो दोष है, जेसे रोष, क़ोध आदि उनको त्याग करना परम आवश्यक है। Reply
2 Responses
होश को आचार्य श्री विघासागर महाराज ने परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जोश के साथ होश रखना परम आवश्यक है। अतः जो दोष है, जेसे रोष, क़ोध आदि उनको त्याग करना परम आवश्यक है।
Bahut hi sundar post hai ! Acharya Shri ke charnon me shat shat naman !