उतावली
एक बहन धार्मिक क्रिया के लिए छोटी सी मटकी को नल के नीचे लगाकर नल पूरा खोल देती थीं (ताकि जल्दी भर जाए, पर आधी अधूरी ही भरती थी)। एक दिन दूसरा काम कर रही थी, नल को थोड़ा सा खोला। देखा! मटकी ऊपर तक भर गई थी।
एकता – पुणे
सीख –> उतावली की तो आधे अधूरे रह जाओगे। सब्र का फल पूरा/ मीठा होता है।
चिंतन



