Category: चिंतन

दीन / शुद्ध

अपने को दीन मानना जैसे हीरे को काँच मानना। शुद्ध मानना जैसे ख़दान में पड़े हीरे को तराशा हुआ हीरा मानना। चिंतन

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पुरुषार्थ / भाग्य

पुरुषार्थ पहले या भाग्य ? सुभाष भाग्य से ही पुरुषार्थ कर पाते हैं। तब और ज्यादा अच्छा भाग्य बन जाता है, फिर ज्यादा पुरुषार्थ कर

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मान

कार के टायर के नीचे आने से पैर कुचल गया। पर टायर तो रबड़ का और रबड़ मुलायम ? हवा भर दी सो कठोर हो

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सम्बन्ध

बच्चा माता पिता के बीच सो रहा है, सर्वाधिक सुरक्षित महसूस करता है। स्वप्न में शेर उसे खाने आया। बचायेगा कौन ? कोई सम्बंधी नहीं।

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संस्कार

वृद्धावस्था में इन्द्रियाँ/ दिमाग शिथिल हो जाते हैं। जिन चीज़ों में पहले से रुचि है वही आगे बढ़ जातीं हैं। यदि खाने में तो खाते

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सुधार प्रवृत्ति

सामूहिक पूजा करते समय, प्रायः लोग सामग्री पटकते हैं। सलीके से चढ़ायें, तो टेबल/ थाली सुंदर दिखे। सामने वाला बायें पर डाले तो आप दायें

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कर्मफल

मौसमी के 6-7 फ़ीट के पेड़ पर हज़ारों फूल लगे। बाद में सैकड़ों छोटी-छोटी मौसमी की गाँठें सी बन गयीं। चिंता हुई कि ये छोटा

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स्वभाव

Boss के Boss तक मेरे मित्र ने मेरे ख़िलाफ़ शिकायत की। मैं Boss के पास जाकर दु:खी हुआ। Boss… ये तो तुम्हारे हित में हुआ

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दया

दया तो आत्मा का स्वभाव है, हर जीव में पाया जाता है, अपने बच्चों के प्रति हिंसक जानवरों तक में। जैसे-जैसे आत्मा विशुद्ध होती जाती

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मंगल आशीष

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May 7, 2026

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