क्रोध
निमित्त मिलने पर, नैमित्तिक-भावों से क्रोध आता है ;
ये निमित्त बाह्य या अंतरंग भी हो सकते हैं ।
2) क्रोध अज्ञानी को ही आता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
निमित्त मिलने पर, नैमित्तिक-भावों से क्रोध आता है ;
ये निमित्त बाह्य या अंतरंग भी हो सकते हैं ।
2) क्रोध अज्ञानी को ही आता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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One Response
क़ोघ-अपने और दूसरे से घात या अहित करने रुप क़ूर परिणाम को कहते हैं। अतः निमित्त मिलने पर,नैमित्तिक भावों से क़ोध आता है। यह निमित्त ब़ाह्म या अंतरंग भी हो सकते हैं। अतः अज्ञानी को ही क़ोध आता है।