अहिंसा / अनुकम्पा
अहिंसा मुनियों के लिये क्योंकि उनके पास अनुकम्पा करने के साधन नहीं होते हैं।
अनुकम्पा तो गृहस्थों के लिये होती है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
अहिंसा मुनियों के लिये क्योंकि उनके पास अनुकम्पा करने के साधन नहीं होते हैं।
अनुकम्पा तो गृहस्थों के लिये होती है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
अहिंसा/अनुकम्पा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गृहस्थयों को अनुकम्पा का भाव पालन करना परम आवश्यक है।