सामान्यजन का ज्ञान प्राय: धारावाहिक/ पुनरावृत्ति वाला होता है।
यही सही है (चाहे झूठ ही क्यों न हो) मिथ्याज्ञान है, क्योंकि संयोगपने से पैदा होता है।
जैसे बहू की पीड़ा को झूठा मानते हैं क्योंकि सास ने भी बहाने बनाये थे।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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ज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमार्थ का ज्ञान करना परम आवश्यक है।
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