जरूरत के चरण

जरूरत के चरण…

  1. भूख/ शरीर सम्बन्धित।
  2. सुरक्षा।
  3. परिवार/ संगति।
  4. सम्मान।
  5. आत्मनिष्ठ/ आत्मजागृति।

पूर्व के दर्शन में भगवान राजाओं के पुत्र थे सो चार चरण पहले ही पूरे थे, अतः पाँचवें चरण तक पहुँचते थे।

पाश्चात्य के चार ही। इसलिए तुलसीदास जी ने कहा है – “हारे को हरी नाम”।

ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया

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One Response

  1. जरुरत के चरण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु पांचों चरण परम आवश्यक है। जीवन में कमसे कम चार चरण करना भी परम आवश्यक है।

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