Category: डायरी

उत्तम संयम धर्म

कषायों को मंद करने के बाद ही सत्य प्रकट होता है और सत्य हाथ से फिसल न जाए उसके लिए संयम रखना पड़ता है/ संयम

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उत्तम सत्य धर्म

चार कषायें जब समाप्त या मंद पड़ जाती हैं तब जीवन में सत्य प्रकट होता है। जो दिखता है वह सत्य नहीं, ना दिखने वाला

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उत्तम शौच धर्म

लोभ का उल्टा शौच यानी पवित्रता। जितनी अपेक्षाएं ज्यादा होगीं, उतना लोभ ज्यादा होगा। जिसके मन में लोभ आ जाए उसके आसपास का वातावरण कुशलहाल

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उत्तम आर्जव धर्म

मायाचारी का उल्टा/ मन वचन काय की एकरूपता आर्जव धर्म है। एक मासोपवासी(बहुत अंतराल के बाद आहार लेने वाले) मुनिराज तपस्या करके चले गए। उसी

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उत्तम मार्दव धर्म

(धर्म और गुरु की ना मानना, मान है) मान का विपरीत, अपने मान को मान ना देना, दूसरे के मान से आहत न होना मार्दव

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अपेक्षा

10 आमों में एक और मिलाया तो कुल कितने हुए ? 12 कैसे ? 10 + 1 + 1 मेरे पास पहले से था। हम

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निर्लिप्तता

महावीर मुनि अवस्था में एक गांव में लंबे समय तक ध्यान तप करते रहे। गांव वालों ने घास की झोंपड़ी बना दी। गांव वालों ने

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प्रायश्चित

एक राजा को घोड़ा बहुत प्यारा था। पर उसकी बुरी आदत से राजा को नीचा देखना पड़ता था। चलते-चलते घोड़े को खाने की चीज दिख

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अकड़ / पकड़

अकड़ नहीं तो पकड़ (चैंट जाना/ स्वाभिमान को देना) भी नहीं होनी चाहिए।

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मंगल आशीष

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