गुणस्थानों में बंध
दूसरे गुणस्थान में मिथ्यात्व तो है नहीं, बंध कारण अनंतानुबंधी जनित अविरति है। क्योंकि मिथ्यात्व के बाद बंध का दूसरा प्रत्यय अविरति ही है। चौथे गुणस्थान में अप्रत्याख्यान से उत्पन्न अविरति, पाँचवें गुणस्थान में प्रत्याख्यान से उत्पन्न अविरति कारण।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – 9/03)




5 Responses
गुण स्थानों में बंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
‘प्रत्यय’ ka kya meaning hai, please ?
कारण/ निमित्त।
Wonderful ! Namostu Gurudev !
Okay.