धर्मात्मा…
जो काँटों* से ही नहीं, फूलों** से भी बच कर चले।
चिंतन
*पाप
**पुण्य/ सुविधायें
Share this on...
One Response
धर्मात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।धर्म का आश्रय पर चलने वालों को बहुत बहुत कठिनाई आती रहती है, लेकिन समता का भाव रखना परम आवश्यक है। अतः जीवन में धर्मात्मा को मोक्ष मार्ग चलना परम आवश्यक है। धर्मात्मा को अपनी आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है।। धर्मात्मा पापों से बचते हैं एवं पुण्य अर्जित होता है।
One Response
धर्मात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।धर्म का आश्रय पर चलने वालों को बहुत बहुत कठिनाई आती रहती है, लेकिन समता का भाव रखना परम आवश्यक है। अतः जीवन में धर्मात्मा को मोक्ष मार्ग चलना परम आवश्यक है। धर्मात्मा को अपनी आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है।। धर्मात्मा पापों से बचते हैं एवं पुण्य अर्जित होता है।