निद्रा
- निद्रा –> सामान्य शरीर को आराम देने। जल्दी जग भी जाते हैं, जगने पर स्वस्थ महसूस, दोबारा सोने का मन नहीं।
- निद्रा-निद्रा –> आंखें खुलती नहीं, खर्राटे, खड़े-खड़े सो जाएँ।
- प्रचला –> हिलने डुलने लगें। उपदेश में सो जाएँ, लार।
- प्रचला-प्रचला –> सोते में चलें।
- स्त्यानगृद्धि –> रौद्रपने का साहस।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थसूत्र – अध्याय 8)



