बंधन
क्या धर्म के नियम बंधन नहीं ?
बंधन दो प्रकार के…
- जो पराश्रित करें/ दुःख दें, जैसे सांसारिक।
- दो… जो स्वाश्रित करें/ सुख दें, जैसे धर्म के।
सम्यग्दर्शन गुरु की देशना से। क्षायिक सम्यग्दर्शन केवली के पादमूल में, ये बंधन नहीं निमित्त/ व्यवस्था है जैसे नदी के दो पाट गंतव्य तक ले जाने को।
इंद्रियों को बांधा नहीं, संयमित किया जाता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




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बंधन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में बंधन भगवान् एवं गुरुजनों से रखना परम आवश्यक है, ताकि धर्म मिलने पर मन को पवित्र बनाया जा सकता है। संसार से बंधनों को समाप्त करने का प्रयास करना परम आवश्यक है।