विनाश
बड़े/ पूज्य जैसे पिता/ गुरु अपनी खुद की चिंता/ भला करने लगें; पिता कमाये छोटे बैठे रहें, तो दोनों का विनाश।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
बड़े/ पूज्य जैसे पिता/ गुरु अपनी खुद की चिंता/ भला करने लगें; पिता कमाये छोटे बैठे रहें, तो दोनों का विनाश।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
4 Responses
भला एवं विनाश को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए हमेशा भला सोचना परम आवश्यक है।
Can meaning of the first line be explained a little more in detail, please ?
बड़े जैसे पिता, पूज्य जैसे गुरु यदि वे अपनी चिंता खुद करने लगें/ अपने भले का काम खुद करने लगें तो यह न महाराज जी के लिए शोभाजनक है, ना श्रावकों के लिए। मुनिराज अपने पद से नीचे गिरेंगे, श्रावक अपने कर्तव्य से तो दोनों का ही विनाश हुआ ना !
Okay.