बीज को मुट्ठी में पकड़े रहने से उसकी सुरक्षा नहीं/ उसकी संतति नहीं।
माटी को मान देने से मान रूपी बीज जब अपना मान समाप्त कर देता है तब वह वृक्ष बनकर सबका सम्मान पाता है।
अपना मान मिटाने से ही सम्मान मिलता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)
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मान एवं सम्मान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मान का विचार भाव रखना उचित नहीं होगा ताकि सम्मान प़ाप्त होना परम आवश्यक है।
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मान एवं सम्मान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए मान का विचार भाव रखना उचित नहीं होगा ताकि सम्मान प़ाप्त होना परम आवश्यक है।