मिथ्यात एवं कषाय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कषाय का त्याग करना परम आवश्यक है। Reply
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मिथ्यात एवं कषाय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कषाय का त्याग करना परम आवश्यक है।
‘मिथ्यात्व पदार्थों को छोड़ने नहीं देती।’ Is statement ka meaning explain karenge, please ?
मोह, मिथ्यात्व का ही तो स्वरूप है। अहितकारी को हितकारी मानता है। मोह है तो छोड़ेगा कैसे!
Okay.