विवाह विषयों के निमंत्रण के लिये नहीं, नियंत्रण के लिये।
विवाह दवा है, इसे भोजन मत बनाना।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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आचार्य श्री विघासागर महाराज जी ने विवाह को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए संसार नहीं बढाना आवश्यक है, इसके लिए इन्दियो पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है।
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आचार्य श्री विघासागर महाराज जी ने विवाह को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए संसार नहीं बढाना आवश्यक है, इसके लिए इन्दियो पर नियंत्रण रखना परम आवश्यक है।