अविरति
1. अविरति के दो प्रकार का असंयम…
i. प्राणी असंयम → षटकाय जीवों की रक्षा के भाव न होना।
ii. इंद्रिय असंयम → मन + इन्द्रियों का।
जिसके इंद्रिय असंयम होगा यानी इन्द्रियों के विषयों से राग। उसके प्राणी संयम भी नहीं होगा।
2. अविरति यदि मिथ्यादृष्टि है तो अनंतानुबंधी तथा सम्यग्दृष्टि के अप्रत्याख्यान कषाय रहती है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र)




4 Responses
अविरति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Is post me 1st aur 2nd sentence alag-alag hain na ? Ise clarify karenge, please ?
सही।
Okay.