Month: August 2023
प्रतिमा / आहार
7 प्रतिमा तथा अधिक को आहार के लिये – “आहार जल शुद्ध है, कृपया भोजन ग्रहण करें” कहें। पर “मन, वचन, काय शुद्ध है”, नहीं
देवों की उत्पत्ति
मिथ्यादृष्टि देव, पृथ्वी, जल, वनस्पतिकायिक बादर पर्याप्तक में जन्म ले सकते हैं। पर अग्नि, वायुकायिक में नहीं क्योंकि वहाँ के लिये बहुत संक्लेषित भाव होने
इन्द्रिय विजय
इन्द्रिय विजय का तरीका पूछने पर आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा- “इन्द्रियों का काम मन से मत लेना। इन्द्रियों के संवेग को कम करने
संक्लेष / ज्ञानावरण
अच्छी याददाश्त तथा शुभ-कर्मबंध संक्लेष के अभाव में होता है। याददाश्त के लिये ज्ञानावरण का क्षयोपशम भी जरूरी रहता है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
आलस्य
आलस्य (प्रमाद) भीति तथा प्रीति से ही कम होता है। भीति – आलसी को बोल दो साँप आ गया, तब आलस्य रहेगा ! प्रीति –
देशावधि की सीमा
1. देशावधि की जघन्य सीमा – मनुष्य/ तिर्यंचों/ नारकियों में- 1 कोस, देवों में – 25 योजन। 2. उत्कृष्ट, महाव्रतियों की (लोकाकाश)। मुनि श्री प्रणम्यसागर
जिम्मेदारी
जिम्मेदारी दुनिया का सबसे बहतरीन टॉनिक है। एक बार पी लो जिंदगी भर थकने नहीं देती है। (अरविन्द बड़जात्या)
परीक्षा/आज्ञा प्रधानी
सिर्फ परीक्षा-प्रधानी के द्वारा अवहेलना की संभावना, सिर्फ आज्ञा-प्रधानी के द्वारा अंधविश्वासी होने की संभावना। जैन-दर्शन पहले परीक्षा फिर आज्ञा मानता है। परीक्षा के बाद
संस्कार
संस्कार तो ‘Groove’ जैसे होते हैं, उसी में से प्रवाह होता रहता है। यदि इससे आत्मा पतित/ दुखी हो रही हो तो उसके Side में
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