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आकार

वर्ण, गंध, शब्द, स्पर्श, रस का भी आकर है क्योंकि ज्ञान का विषय साकार होता है। आचार्य श्री विद्यासागरजी (भगवती आराधना भाग 1,गाथा 4,पेज 53)

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मन / वचन / काय

मन → बालक (चंचल)। वचन → पिता, कड़े शब्दों का प्रयोग। काय → माँ, पिटाई भी कर देती है। मुनि श्री मंगल सागर जी

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मंगल आशीष

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