प्राय: पुण्य के उदय में पाप करने का मन होता है और पाप के उदय में पुण्य का।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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जीवन के कल्याण हेतु पुण्य अर्जित करने के उपरांत पापों से बचना परम आवश्यक है। इसके अतिरिक्त पुण्य का उपयोग का निषेध करना परम आवश्यक है। जीवन में पापों से बचना परम आवश्यक है।
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जीवन के कल्याण हेतु पुण्य अर्जित करने के उपरांत पापों से बचना परम आवश्यक है। इसके अतिरिक्त पुण्य का उपयोग का निषेध करना परम आवश्यक है। जीवन में पापों से बचना परम आवश्यक है।