Day: June 14, 2025

ब्रह्मचर्य

संसार रूपी भ्रम को पहचान कर ब्रह्म को चरना/ आचरण करना ब्रह्मचर्य है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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समाधिमरण

समाधिमरण के समय संबोधन कम करना चाहिए। शरीर शिथिल हो रहा होता है, अधिक संबोधन अतिभारारोपण हो जाएगा और उसके भाव ख़राब हो सकते हैं।

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मंगल आशीष

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