Day: June 30, 2025

अवगाहना/ आवली

अवगाहना घनफल रूप भी होती है(गाथा 96)। आवली को अवगाहना तथा भाव(गुणाकार रुप) में भी लिया है(गाथा 101)। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड –

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परमात्मा

यदि पर की ओर देखना ही है तो “पर की आत्मा” की ओर क्यों न देखें! ताकि आप परमात्मा बन सकें। चिंतन

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मंगल आशीष

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June 30, 2025