Month: January 2026
केवली के निर्जरा
ऐसा लगता है कि 13वें गुणस्थान में आखिरी अंतर्मुहूर्त को छोड़कर सविपाक निर्जरा ही होती है। चिंतन
मोह
मोह प्राय: निकृष्ट/ लुटोरों/ खचोरों से ही होता है। क्षु. सहजानंद जी (सज्जन लूटेगा/ खचोरेगा नहीं)
अंतराय / गोत्र
अंतराय, गोत्रकर्म में विघ्न कैसे डालता है ? उच्चगोत्र वालों से नीचगोत्र जैसे कर्म करवा कर। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8)
निराकुलता
अतिभाव तथा अतिअभाव दोनों ही आकुलता देते हैं।* समभाव से ही निराकुलता आती है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी *(अतिनिर्देश भी)
मन
द्रव्य-मन… पौद्गलिक, भाव-मन… आत्मा की परिणति। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
विश्वास
वृद्धों में प्राय: अंधविश्वास देखने में आता है। युवाओं में अंधाविश्वास। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
“पर”
“पर” को अपना मानने की आदत नहीं छूट रही तो “पर” के घर आदि को अपना मान कर देख लो। क्षु. सहजानंद जी
विद्याधरों को विद्या
विद्याधरों को 5 विद्यायें कुल-परम्परा से मिलती हैं। आगे सिद्ध करके/ छीनकर ली जाती हैं। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जीवकांड गाथा – 360 )
अहंकार
अहंकार… राजा भोज के दरबार में एक ज्ञानी ने कोरे कागज पर बिना कुछ लिखे बताया कि इस कागज पर एक सुंदर कविता लिखी है।
Recent Comments