अपने को दीन मानना जैसे हीरे को काँच मानना।
शुद्ध मानना जैसे खदान में पड़े हीरे को तराशा हुआ हीरा मानना।
चिंतन
Share this on...
4 Responses
दीन/शुद्ध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में दीन बनने से बचना चाहिए एवं अपने को शुद्ध बनने के लिए जीवन तरासकर पवित्र बनने का प़यास करना आवश्यक है।
4 Responses
दीन/शुद्ध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में दीन बनने से बचना चाहिए एवं अपने को शुद्ध बनने के लिए जीवन तरासकर पवित्र बनने का प़यास करना आवश्यक है।
That means hume apne aap ko na ‘दीन’ manana hai aur nahi ‘शुद्ध’ ? Ise confirm karenge,
please ?
सही।
Okay.