Day: January 5, 2026

आलोचना आदि दोष

आलोचना… स्वयं के दोषों को दूर करना/ दूर करने के लिये। गर्हा……….. दोषों से घृणा करना। निंदा……….. बुरा कहना। तीनों स्वयं के लिये प्रशंसनीय, पर-प्रत्यय

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वर्तमान

भविष्य वर्तमान का ही तो Extension है। वर्तमान अच्छा तो, भविष्य अच्छा होगा ही। * गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी * (भूतकाल के दोषों को

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मंगल आशीष

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January 5, 2026