Month: January 2026

भगवान का श्वेत रक्त

प्रथमानुयोग के अनुसार भगवान का श्वेत रक्त होता है (5 कल्याणक वालों का)। लेकिन सिद्धान्त ग्रंथों में ऐसा वर्णन नहीं आता है। निर्यापक मुनि श्री

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बहुलता

पौधे कम खाद देने पर कम मरते हैं, ज्यादा खाद देने पर ज्यादा। शरीर/ संसार के लिये Excess ज्यादा हानिकारक है। मुनि श्री मंगलानन्द सागर

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उदयाभावी क्षय

क्षय कैसे ? गंदगी का ऊपर न आने देना, उदयाभावी क्षय। उपशम कैसे ? सदवस्था रुप उपशम, गंदगी नीचे ही बैठी है। मुनि श्री मंगलसागर

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वृद्ध

वृद्ध काँच के जार में रखी गोल्डफिश जैसे होते हैं। हर एक की निगाह उन पर होती है। इसलिए उनको अपने आचरण के प्रति बहुत

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परिणमन

परिणमन पर-निमित्तक भी तथा स्व-निमित्तक भी। जैसे दर्पण में प्रतिबिम्ब बदलते रहते हैं, लेकिन दर्पण को आकाश की ओर कर दें तब भी दर्पण में

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धर्म / अधर्म

अपराध करना अधर्म। उसका फल सहजता/ स्वीकृति के साथ सहना, धर्म। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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साधु

साधु का घर दूर है जैसे पेड़ खजूर, चढ़े तो मीठे फल चखे, गिरे तो चकनाचूर। मुनि श्री अजितसागर जी

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जिन

जिन की भक्त्ति, जिन जिन ने की है, वे जिन बने। निर्यापक मुनि श्री योगसागर जी

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तप

तप/ ताप (गर्मी) से हम बहुत घबराते हैं। जबकि ताप के बिना न अनाज आदि पैदा होगा, ना ही उसे पचा (जठराग्नि) पाएंगे। आचार्य श्री

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मंगल आशीष

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January 26, 2026