वाचना का अर्थ है प्रदान करना/ शिष्यों को पढ़ाना।
Self Study नहीं, इससे ही एकांत-मत पनप रहे हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का कथन सत्य है कि वाचना का अर्थ है प़दान करना यानी शिष्यों को पढाना! यह भी सही है कि स्वयं पढना नहीं क्योंकि एकांत मत पनपते हैं! जैन धर्म अनेकान्तवाद को मानता है!
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का कथन सत्य है कि वाचना का अर्थ है प़दान करना यानी शिष्यों को पढाना! यह भी सही है कि स्वयं पढना नहीं क्योंकि एकांत मत पनपते हैं! जैन धर्म अनेकान्तवाद को मानता है!