Month: April 2026

उदयाभावी क्षय

उदयाभावी क्षय…. अनंतानुबंधी का तीन परमुख (अप्रत्याख्यान, प्रत्याख्यान, संज्ज्वलन) उदय होना। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी जैसे सर्दी में ओवरकोट पहनें हों। उसकी जगह स्वेटर

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आशीष / शाबाशी

शाबाशी अच्छे/ बुरे कामों पर भी। इससे अहंकार आता है। आशीष सिर्फ अच्छे कामों के लिये ही। इससे अहंकार घटता है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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कर्म

कर्म चोर बहु फिरत हैं… यह कहावत सही नहीं है। कर्म तो साहूकार हैं, उनका कर्ज़ा कभी चुकता नहीं है। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

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धन / ज्ञान

एक देवता यदि आपको वरदान दे कि कल अम्बानी बना दूंगा पर ज्ञान छीन लूंगा, तो लाभ क्या ? अम्बानी होने का बोध ही न

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दुर्जन

साँप को साँप कहो या साँप जी, वह तो डसेगा ही। क्रिस्टोफ़र नोलन

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भाव

1. औदयिक भाव….. भरपूर भोक्ता, जैसा मिला खाया। 2. औपशमिक भाव…. मिर्ची वाले भोजन में शक्कर मिलाकर। 3. क्षायोपशमिक भाव… बड़ी मिर्ची (सर्वघाती प्रकृति) निकालकर,

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सम्बन्ध

बच्चा माता पिता के बीच सो रहा है, सर्वाधिक सुरक्षित महसूस करता है। स्वप्न में शेर उसे खाने आया। बचायेगा कौन ? कोई सम्बंधी नहीं।

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भय/अभय

शेर का बच्चा गीदडों के साथ रहकर भी सुखी रहता है, शेरों के पास भी सुखी। तो फर्क क्या हुआ? गीदड़ों के पास भयभीत रहता

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मापदंड

राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी। सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोडे, सैनिक

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मंगल आशीष

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April 30, 2026